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  'साहित्य के शनिदेव' हरिशंकर राढ़ी के चौथे व्यंग्य संग्रह 'साहित्य के शनिदेव'का विमोचन संपन्न साहित्य के शनिदेव  आज विश्व पुस्तक मेला (13 जनवरी, 2026), दिल्ली के हॉल नंबर 2 में न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन के स्टॉल पर मेरे चौथे व्यंग्य संग्रह 'साहित्य के शनिदेव' का विमोचन संपन्न हुआ. विमोचन समरोह में वरिष्ठ व्यंग्यकार श्री सुभाष चंदर, व्यंग्यकार और व्यंग्यलोचक श्री रणविजय राव, 'नई धारा' के संपादक श्री शिवनारायण जी, NBT के हिंदी संपादक श्री दीपक कुमार गुप्ता युवा व्यंग्यकार श्री सुमित प्रताप सिंह, युवा लेखक श्री सुमित राजौरा, समकालीन अभिव्यक्ति के संपादक श्री उपेंद्र कुमार मिश्र, न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन के श्री चंद्रा जी तथा अन्य अनेक मित्र एवं पाठकगण सम्मिलित रहे. विमोचन करते वरिष्ठ व्यंग्यकार श्री सुभाष चंदर, रणविजय राव, दीपक गुप्ता,उपेन्द्र कुमार मिश्र, सुमित प्रताप सिंह, सुमित राजोरा तथा अन्य साहित्यकार  वरिष्ठ व्यंग्यकार सुभाष चंदर जी, रणविजय राव जी, दीपक कुमार गुप्ता जी, शिव नारायण जी, सुमित प्रताप सिंह जी, उपेंद्र कुमार मिश्र जी तथा चंद्रा जी ने अपने विचा...
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'नयन और बानी' हरिशंकर राढ़ी के  ललित निबंध 'नयन और बानी' का लोकार्पण ललित निबंध संग्रह का मुखपृष्ठ  दिनांक 15 जनवरी, 2026 को दिल्ली के विश्व पुस्तक मेले के हॉल नंबर 2 में ‘सर्व भाषा ट्रस्ट’ के स्टॉल पर मेरे दूसरे ललित निबंध संग्रह के ललित निबंध संग्रह 'नयन अरु बानी' का विमोचन और लोकार्पण सम्पन्न हुआ। मेरे ललित निबंध के साथ ही उपेन्द्र कुमार मिश्र के ग़ज़ल संग्रह 'दिल के समंदर में' का भी विमोचन हुआ। इस अवसर पर प्रसिद्ध नाटककार एवं कवि डॉ. प्रताप सहगल जी, कवयित्री डॉ. शशि सहगल जी, प्रखर आलोचक-कवि डॉ ओम निश्चल जी, कवि- लेखक और दिल्ली विश्वविद्यालय में अंग्रेजी के असोशिएट प्रो वेद मित्र शुक्ल जी, नेशनल बुक ट्रस्ट में संपादक श्री दीपक गुप्ता जी, युवा व्यंग्यकार श्री सुमित प्रताप सिंह तथा सर्व भाषा ट्रस्ट के निदेशक श्री केशव मोहन पांडेय जी की गरिमामयी उपस्थिति रही। विमोचन करते वरिष्ठ साहित्यकार डॉ प्रताप सहगल, डॉ शशि सहगल, डॉ ओम निश्चल, डॉ वेद मित्र शुक्ल, श्री उपेन्द्र कुमार मिश्र  विमोचन का एक और दृश्य  कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ ओम निश्चल जी ने किया, जो सं...

ग्रह और अवतार

इष्ट देव सांकृत्यायन      ज्योतिष को वेदाङ्ग क्यों कहा गया और कैसे अवतारों को ग्रहों से जोड़ा गया , क्यों ऐसा माना जाता है कि ग्रह रूप में स्वयं श्रीमन्नारायण ही सृष्टि के सभी क्रियाकलापों पर दृष्टि रखते हुए उसका संचालन करते हैं... ऐसे कई प्रश्नों का उत्तर बृहत पाराशर होराशास्त्र के आरंभ में ही है। पहले ही अध्याय सृष्ट्यादिक्रम का 24 वाँ श्लोक है -   राम: कृष्णश्च भो विप्र नृसिंह: शूकरस्तथा। इति पूर्णावतारश्च ह्यन्ये जीवांशकान्विता:॥ अर्थात राम , कृष्ण , वराह और नृसिंह ये पूर्ण अवतार हैं। शेष अवतार जीवांशयुक्त हैं।   आगे वे इसे और स्पष्ट कर देते हैं , यह कहते हुए कि - अवताराण्यनेकानि ह्यजस्य परमात्मनः। जीवानां कर्मफलदो ग्रहरूपी जनार्दनः॥ अर्थात परमात्मा , जो कि अजन्मा है , उसके अनेक अवतार हैं। जीवों को उनके कर्मों के अनुसार फल देने के लिए ग्रहों के रूप में भगवान जनार्दन ने ही अवतार लिया है। और उनके इन अवतारों का उद्देश्य केवल इतना ही नहीं है कि वे जीवों को उनके कर्मों का ही फल दें। इनके और भी काम हैं , और भी उद्देश्य हैं। वह क्या हैं ? ...

विश्वशांति के लिए खतरा मत्स्यन्याय

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  इष्ट देव सांकृत्यायन बात बेहद कड़वी है, लेकिन वस्तुस्थिति को सरल शब्दों में समझाने का इससे बेहतर तरीका नहीं है। भगवान न करें, लेकिन मान लीजिए कि आपके पास बहुत उपजाऊ खेत हों और उस पर किसी माफिया की नजर हो। वह माफिया कल अपना गिरोह लेकर आए और आपका अपहरण कर ले जाए। साथ नाचने के लिए सौ-दो सौ भाड़े के नचनिए लेकर आए और आपके अपहरण के बाद उन्हें आपके दरवाजे पर नचाने लगे, या आपके ही परिवार के किसी बिगड़े हुए गजेड़ी बच्चे को सुलफा सुंघाकर नचाने लग जाए, तो क्या इससे ये सिद्ध हो जाता है कि आपके अपहरण और आपके खेतों पर उस माफिया के कब्जे से आपके परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई है? बिलकुल यही वेनेजुएला के साथ हो रहा है। दुर्भाग्य यह कि नरेंद्र मोदी के नाम पर दशकों से भारत के अहित की कामना में लगे हुए चुटकी भर निर्लज्ज लालची तत्त्व इन भाड़े के नचनियों को उदाहरण बना रहे हैं। जबकि सच यह है कि ट्रंप जैसे बड़बोले तानाशाह के नेतृत्व में संयुक्त राज्य अमेरिका, न केवल पूरे उत्तर एवं दक्षिण अमेरिकी महाद्वीप, बल्कि विश्वशांति के लिए खतरा बन चुका है। इससे भी बड़ा दुर्भाग्य यह है कि पूरा यूरोपीय यूनियन लंबे समय से अ...

फर्जी बाबा का कॉलेज और डिप्लोमेटिक नंबर वाली गाड़ी

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  ये स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती डिप्लोमेटिक नम्बर की गाड़ी लेकर दिल्ली में कब से चल रहा था? उस दिल्ली में जहाँ केंद्र और राज्य दोनों की सरकारें हैं। कई ठो स्थानीय सरकारें नगर निगम के नाम पर हैं। थोक के भाव से आईएएस-आईपीएस हैं। उसी के पॉश कहे जाने वाले इलाके वसंत कुंज में इसका तथाकथित आश्रम है और वहीं इसका मैनेजमेंट कॉलेज है। तबसे कितनी सरकारें आई-गईं? दिल्ली पुलिस के कितने प्रमुख बदले? किसी की नजर ही नहीं पड़ी इस पर? बीट के कॉन्स्टेबल से लेकर एसएचओ तक किसी का इतना आईक्यू नहीं था कि एक बार जरा आईटीओ वालों से ही बात कर ले? कल को अगर आतंकवादी ऐसे ही अपनी कार पर डिप्लोमेटिक नंबर लगाकर चले, तो सोचिए.... भारत की वामपंथी और झामपंथी दोनों तरह की सरकारों ने कुल मिलाकर पढ़ाई को एक बिना हर्रे-फिटकरी वाला मुनाफे धंधा समझते हुए इसे पहले सरकार के कब्जे से बाहर किया और फिर इस पर डकैतों को बैठा दिया। यही हाल चिकित्सा का हुआ है। चंबल के महापुरुषों का पुनर्वास सबसे पहले शिक्षा क्षेत्र में ही किया गया। उन्होंने पहले पेरेंट्स को भरपूर लूटा। अब उससे भी मन न भरा तो बच्चियों की इज्जत पर डालने लगे। ऐसा ही कुछ...

भारत पर ग्रहण का प्रभाव नहीं, अत्यंत शुभ है नवरात्र

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इष्ट देव सांकृत्यायन  ॥श्री गुरुचरणकमलेभ्यो नम:॥ ‘ सूर्य ग्रहण की अशुभ छाया में कल शुरू होगी शारदीय नवरात्र ’ यही शीर्षक है एक स्वनामधन्य न्यूज चैनल के स्वनामधन्य वेब पोर्टल पर दिए गए नवरात्र घटस्थापना संबंधी सूचनात्मक आलेख का। वही नहीं , कई अखबारों के पोर्टल भी ऐसा ही कुछ शीर्षक घुमा-फिरा कर लोगों का ध्यान खींचने के लिए लगाए हुए हैं। सुबह जब मैंने व्हाट्सएप पर ग्रहण और नवरात्र को लेकर कुछ मित्रों का प्रश्न देखा तब तक मुझे यह नहीं लगा था ऐसे प्रश्न मीडिया द्वारा फैलाए गए भ्रम के परिणाम हैं। मेरा ध्यान इस मुद्दे पर तब गया जब खबरें देखनी शुरू कीं। ग्रहण को लेकर ऐसे-ऐसे भ्रम फैलाए जा रहे हैं जो कहीं से भी तर्कसम्मत नहीं हैं। जो ग्रहण भारत में दृश्य ही नहीं है , उसका कैसा सूतक और क्या प्रभाव! लेकिन यूट्यूब से लेकर टीवी चैनलों और कई अखबारों तक में उसका राशिफल और परिहार आदि बताए जाने का क्या तुक है ? और अब खींचकर उसे नवरात्र तक ले जाने की धृष्टता!! हद है। वह माँ जिसके लिए कहा गया – यस्या: प्रभावमतुलं भगवाननन्तो   ब्रह्मा हरश्च न हि वक्तुमलं बलं च। सा चण्डिकाखिलजगत्परिपालन...

एच-1 बी वीजा फीस बढ़ोत्तरी बनाम अमेरिकी अर्थसंकट

इष्ट देव सांकृत्यायन एच 1 - बी वीजा की फीस जिस तरह बढ़ाई गई है, यह थोड़े दिन समस्या का कारण भले बन रही हो। लेकिन वास्तव में इसे लेकर भारतीयों को चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। यह दाँव अंततः अमेरिका पर ही उल्टा पड़ने जा रहा है। अभी मरी हुई अमेरिकी अर्थव्यवस्था को संजीवनी बूटी सुंघाने जैसा एक टोटका है। बिलकुल वैसे ही जैसे कि 50% टैरिफ वाला टोटका। न वह टोटका काम आया और न ये टोटका काम आएगा। ट्रंप जी को शायद कोई निर्मल बाबा मिल गए हैं, अपनी मर चुकी अर्थव्यवस्था को फिर से जिंदा करने के लिए टोटके बताने वाले। अमेरिकी निर्मल बाबा की हालत भी शायद बिलकुल अपने निर्मल बाबा जैसी है। न तो उन्हें ज्योतिष आती है, न तंत्र और न ही मनोविज्ञान। बस मीडिया के जरिये एक हाइप क्रिएट की और बन गए बाबा। अपने निर्मल बाबा समोसे के साथ हरी चटनी या गोलगप्पे के साथ मरून कलर वाली चटनी में किरपा अटकी बताते थे। अमेरिका में चटनी तो होती नहीं, तो इनके निर्मल बाबा कभी टैरिफ में किरपा अटका देते हैं और कभी वीजा फीस में। मालूम उन्हें भी है कि होना इससे कुछ नहीं है, पर संकट में फंसे चेले ने पूछा है तो बताना तो कुछ न कुछ पड़ेगा ह...

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